
है कोई आछे मही मंण्डल शूरा ।मनराय सूं झूझ रचायले ।।अथगा थगायलले अबसा बसायले ।।
पंच आत्मा –शरीर रूपी नगर मे पांच ज्ञानईंद्री पांच कर्मईंद्री पांच प्राण इन सब की त्रिपुटी मे मन राज करता है ।राजा व राज्य का कार्यभाल सब मंत्री के हाथ होता है ।आत्मा पंच–मंत्री है यह सब राजा मंत्री का परिवार है।। ।।💐है कोई आछे मही मंण्डल शूरा ।मनराय सूं झूझ रचायले ।।अथगा थगायलले अबसा बसायले ।।💐 हे भग्त जनो ।कोई शूरवीर ही मही–पृथ्वी पर मृत्यू लोक मे एसा कर शक्ता है इस मन रुपी राजा को हरा कर सब…











