
🌸 जाम्भाणी संत सूक्ति 🌸
” एकळवाई थळ सिर ऊभो,केवळ ग्यांन कथै करतार।सुरग देवंण आयो सुचियार,विसंन जपौ दसवैं अवतार।त्रिषा नींद षुध्या तिस नांहीं,जोवो भगतौ आळीगार।आदि विसंन संभरथळ आयौ,लंक तंणों गढ़ लेवंणहार।-(कान्होजी) भावार्थ स्वम्भू भगवान श्री जम्भेश्वर समराथल पर विराजमान होकर कैवल ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। भगवान विष्णु के दसवें अवतार के रूप में अपने सच्चे भक्तों के उद्धार के लिए भगवान आए हैं। भूख-प्यास रहित उनके चिन्मय गुणों से अलंकृत स्वरूप का भक्तो तुम दर्शन करो।त्रैतायुग में लंका विजय करने वाले राम यही है।…












