
🌸 जाम्भाणी संत सूक्ति 🌸
“रंग मां मांडै राड़ि, कुबधि सदा काया बसै। अंतरि सदा उजाड़, सरम नहीं जां साम्यजी। -(केशोजी) -भावार्थ-‘ किसी अच्छे कार्य में विघ्न-बाधा उपस्थित करना जिनका स्वभाव है। ऐसे लोगों का हृदय निरस होता है अन्तर में सदा कुबुद्धि ही उपजति है। ऐसे लोगों को अपने कृत्यों पर ग्लानि भी नहीं होती।’ 🙏 -(जम्भदास)











