
विसनोई धर्म के स्वतंत्र अस्तित्व का पुख्ता प्रमाण
साहबरामजी राहड़ कृत जंभसार के 19वें प्रकरण में वर्णित है कि गुरु जांभोजी औरैया से चलकर मुसाणपुर गाँव पहुँचे। वहाँ उनके दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में लोग आने लगे। उस स्थान पर प्रतिदिन सवा मण घी का होम होता था तथा अखंड ज्योति प्रज्वलित रहती थी। लोग श्रद्धापूर्वक खांड, खोपरा, मिश्री, विभिन्न प्रकार की सुगंधित मिठाइयाँ, तिल, जौ, गिरी, छुहारे, किशमिश, अनाज, घी आदि भेंट स्वरूप लाने लगे। साधुजन निरंतर होम कर रहे थे और सबदों की ध्वनि…










