
🌸 जाम्भाणी संत सूक्ति 🌸
” कउवो चुगै कपूर, हंस हाल्यो दिन कटै। क्या मन की मरजाद, बात बेहमाता थटै। स्वांनि चढ़ै सुखपाल, गऊसुत गुणि उठावै। करि केहरि कूं कैदि, पिंडत पर भोमि हंढ़ावै। -(केसोजी) -भावार्थ-‘ कौवे को पवित्र-पौष्टिक खाना मिलता है,हंस बड़े अभाव में दिन काटता है।कुत्ता सुखदायक सवारी पर चढ़कर चलता है, गोमाता के कोख से जन्मा भारी बोझा उठाता है।शेर कैदी बन जाता है, विद्वान ब्राह्मण रोजी-रोटी कमाने के लिए परदेश में भटकता है। इसमें किसी का दोष नहीं है यह जीव…












