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“एक लख पूत सवा लख नातियां,
दस बंधु सिरताज।
एक सीता के कारणै,
गयो रावण को राज।
-(परमानन्दजी वणियाल)
-भावार्थ-‘ लाखों सदस्यों के परिवार वाले महाबली दशानन रावण का राज्य और लंका का विपुल ऐश्वर्य एक परस्त्री के अपहरण के कारण धूल में मिल गया।’
🙏 -(जम्भदास)
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