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बिश्नोई हो या विश्नोई , विसन या विष्णु

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बिश्नोई हो या विश्नोई , विसन या विष्णु , साथरी या मंदिर, जानो अपना सही इतिहास , हर सवाल का जबाब देगी ये पुस्तकें

साथरियों का इतिहास

यह किताब बिश्नोई धर्म की आस्था, परंपरा और ऐतिहासिक विरासत का एक अहम दस्तावेज़ है, जो बिश्नोई धार्मिक स्थलों, खासकर 'साथरियों' का विस्तृत और प्रामाणिक विवरण देती है। बिश्नोई परंपरा में, साथरियाँ केवल पूजा-स्थल नहीं हैं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा, गुरु-परंपरा और लोक-आस्था के जीवंत केंद्र माने जाते हैं, जहाँ एक पवित्र ज्योति हमेशा जलती रहती है और भक्तों को आध्यात्मिक शांति और प्रेरणा देती है। यह किताब सबसे पहले बिश्नोई धर्म के आठ प्रमुख तीर्थस्थलों का विस्तृत विवरण देती है। इन तीर्थस्थलों को धर्म के आधार-स्तंभ माना जाता है, जो गुरु जांभोजी के जीवन, उनकी शिक्षाओं और उनके द्वारा स्थापित धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं। हर तीर्थस्थल का ऐतिहासिक विकास, वहाँ हुई प्रमुख घटनाएँ और उसका वर्तमान धार्मिक महत्व प्रमाणों के साथ प्रस्तुत किया गया है। कुल मिलाकर, यह किताब 100 से अधिक साथरियों का व्यवस्थित और अच्छी तरह से शोध किया गया इतिहास प्रस्तुत करती है। हर सथारी के विवरण में उसकी भौगोलिक स्थिति, उससे जुड़े संत या घटना और उसकी वर्तमान स्थिति की जानकारी शामिल है। यह किताब न केवल शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए उपयोगी है, बल्कि आम पाठकों के लिए भी बहुत प्रेरणादायक है, क्योंकि इससे उन्हें बिश्नोई धर्म की गहरी आध्यात्मिक परंपराओं, त्याग, तपस्या और प्रकृति-प्रेम को करीब से समझने का मौका मिलता है। इस प्रकार, यह किताब बिश्नोई समुदाय की धार्मिक विरासत को संरक्षित करने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने की एक सशक्त कोशिश है।

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जंभकाल का साहित्य

इस पुस्तक में गुरु जाम्भोजी एवं उनके शिष्यों के कार्य उनकी जीवनियाँ सहित दिये गये हैं:-

1. गुरु जाम्भोजी
2. तेजोजी चरण
3. समशदिन जी
4. डेल्होजी
5. आचरोजी
6. पदम भगत
7. किल्होजी चारण
8. सुरजनजी
9. शिवदासजी
10. एकजी
11. अमियादीनजी
12. जोधोजी रायका
13. केसोजी देहडू
14. लालचंदजी
15. कान्होजी बारहट
16. आसनोजी भट्ट
17. कोल्होजी चारण
18. उडोजी नैण
19. अल्लुजी कविया
20. दीन मुहम्मद
21. रायचंदजी सुथार
22. कुलचंद्राई अग्रवाल
23. राव लूणकरण
24. रेडोजी सांवक
25. वाजिद जी
26. लक्ष्मण गोदारा
27. आलम अग्रवाल
28. रविदास धतरवाल
29. भीमराज
30. सुंदरदीन
31. मेहो गोदारा
32. रहमत
33. गुणादास
34. लखु गोदारा
35. अज्ञात कवि

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उत्तरकाल का साहित्य

इस पुस्तक में निम्नलिखित 44 कवियों की रचनाएँ उनकी जीवनियों सहित दी गई हैं:-
1. देवो जी
2. हरिनन्द जी
3. गोकल जी बैनीवाल
4. रसानन्द जी थापन
5. मुकन जी
6. सेवादास जी गोदारा
7. चतरदास जी
8. सुदामा जी
9. हीरानंद जी
10. हरजी बैनीवाल
11. परमानन्द जी बैनीवाल
12. गोविंदराम जी बागड़िया
13. रामलला जी
14. हरचंद जी डौकिया
15. गंगाराम जी
16. सूरतराम जी
17. मायाराम जी
18.खेरातीराम मेरठी
19. विष्णुदास जी
20. हरिकिशन जी
21. पोकरदास जी
22. उडो जी अडिग
23. मोतीराम जी
24. लिलकंठ (वेचुव)
25. गोविंद राम गोदारा
26. खेमदास जाखड़
27. साधु मुरली दास
28. पीताम्बर दास
29. परसराम
30. केसो सिंवार
31. साहब राम रहद
32.बिहारी दास
33. शीतल
34. स्वामी ईश्वरानंद गिरि
35. स्वामी ब्रह्मानंद
36. हिम्मत राय
37. मुंशी किशोरी लाल गुप्ता
38. माधवानंद
39. बद्रीदास
40. जगमालदास
41. श्री राम दास गोदारा
42. कुंभाराम पूनिया
43. साधु जगदीश राम
44. अज्ञात कवि

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विल्हकाल का साहित्य

इस पुस्तक में निम्नलिखित 17 कवियों की रचनाएँ उनकी जीवनियों सहित दी गई हैं। 1600-1800 के बीच जांभाणी साहित्य की संपूर्ण रचनाएँ, 47 साखी, 88 हरज, 20 गीत, 470 कवित्त, 480 छंद, 35 कथाएँ और अन्य विविध रचनाएँ इस पुस्तक में दी गई हैं: -

01. विल्हो जी (वि.सं. 1589-1673)

02. दासुधिदास जी (वि.सं. की 17वीं शताब्दी)

03. आनंद जी (वि.सं. की 17वीं शती)

04. नैनिग जी (वि.सं. की 17वीं शताब्दी)

05. लालो जी (वि.सं. की 17वीं शताब्दी)

06. गोपाल जी (वि.सं. की 17वीं शताब्दी)

07. हरिराम जी (वि.सं. की 17वीं शताब्दी)

08. दुर्गादास जी (वि.सं. 1600-1680)

09. किशोर जी (वि.सं. 1630-1730)

10. कालू जी (वि.सं. 1630-1730)

11. केसो जी गोदारा (वि.सं. 1630-1736)

12. सुरजन जी पूनिया (वि.सं. 1640-1748)

13. मिठूदास जी (वि.सं. 1650-1750)

14. माखन जी (वि.सं. 1650-1750)

15. रामू जी खोड़ (वि.सं. 1675-1700)

16. रूपो जी बैनीवाल (वि.सं. 1680-1750)

17. दामो जी बैनीवाल (वि.सं. 1680-1768)

18. अज्ञात कवि (वि.सं. की 17वीं शताब्दी)

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Sanjeev Moga
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