Vishnuji

जाम्भाणी संत सूक्ति

ऐप पर पढ़ें!

शब्दवाणी, भजन, आरती, जांभाणी कैलेंडर और बहुत सारे फ़ीचर सिर्फ ऐप्प पर ही उपलब्ध है जरूर इंस्टॉल करें

“पुत्र विना नहीं वंस,
नहीं तया विन गेह।
नीत विनां नहीं राज,
प्राण विना नहीं देह।
धीरज विना नहीं ध्यान,
भाव विन भगति न होय,
गुरु विना नहीं ज्ञान,
जोग विन जुगति न कोय।
संतोष विना कहूं सुख नहीं,
कोट उपाय कर देखो किना।
विसन भगत उधो कहै,
मुक्ति नहीं हरि नाम विना।
-(उदोजी नैण)
-भावार्थ-‘ पुत्र के बिना वंश, स्त्री के बिना घर, नीति के बिना राज,प्राण के बिना शरीर, धैर्य के बिना ध्यान,भाव के बिना भक्ति, गुरु के बिना ज्ञान, युक्ति के बिना योग, संतोष के बिना सुख और कोई चाहे करोड़ उपाय कर ले परन्तु हरि नाम के बिना मुक्ति असम्भव है।
(जम्भदास)

ऐप पर पढ़ें!

शब्दवाणी, भजन, आरती, जांभाणी कैलेंडर और बहुत सारे फ़ीचर सिर्फ ऐप्प पर ही उपलब्ध है जरूर इंस्टॉल करें


Discover more from बिश्नोई

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Sanjeev Moga
Sanjeev Moga
Articles: 2350