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पूर्व विधायक श्री बिहारीलाल बिश्नोई एवं श्रीमती अल्का बिश्नोई की सुपुत्री कु. लावण्या बिश्नोई को अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की परीक्षा में ऑल इंडिया 119वीं रैंक प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ।
यह शानदार उपलब्धि न केवल आपके परिवार, बल्कि नोखा, बीकानेर और पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। आपकी मेहनत, लगन और समर्पण सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आप भविष्य में भी निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करें और देश-समाज का नाम रोशन करें।

समराथल फाउंडेशन के सहयोग से 43 बच्चे डाक्टर बन रहे है। सभी सफल अभ्यर्थियों को बहुत बहुत बधाई एवम शुभकामनाऐ। समराथल फांउडेशन का बहुत बहुत आभार।बहुत-बहुत धन्यवाद

अचिंत बिश्नोई पुत्री श्री विजय कड़वासरा , गांव नाईवाला, जिला हनुमानगढ़, राजस्थान का चयन सहायक कमांडेंट (Assistant Commmandant) (DSP) के पद पर हुआ है । यह बिश्नोई समाज के लिए बहुत ही गौरवान्वित पल है ।
आज एक बेटी ने अपने गांव और बिश्नोई समाज का नाम रोशन किया है।

बहुत ही गर्व का विषय ,हमारे पड़ोसी गांव खजुरी जाटी की बेटी अनामिका पुत्री श्री राजेश मांझू को नीट 2026 में सफलता हासिल करने पर बहुत बहुत बधाई

सुमन ईसरवाल सुपुत्री श्री सहीराम बिश्नोई को NEET 2026 में 9897 AIR से परीक्षा में सफलता प्राप्त करने पर बहुत – बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं

रवींद्र पुत्र जिवणराम जी खिचङ हेमाणी फूलासर का NEET 2026 मे चयन होने पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाऐ और आगे बढते रहो गुरु जम्भेश्वर भगवान का आशीर्वाद सदैव बना रहे ।
एरिया में कुछ और समाज से प्रेरित करने वाली प्रतिभाएं

ढाणी मोहब्बतपुर की बेटी ने रचा इतिहास — पूरे गांव का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया!
“बेटियाँ जब उड़ान भरती हैं, तो केवल अपने सपने नहीं, पूरे गांव की पहचान भी ऊँची कर देती हैं।”
आज हमारे लिए अत्यंत गर्व और खुशी का दिन है।
ढाणी मोहब्बतपुर, जिला हिसार की होनहार बेटी रितिका खटावलिया ने NEET परीक्षा में 720 में से 639 अंक प्राप्त कर डॉक्टर बनने का गौरव हासिल किया है।
रितिका के पिता श्री जगदीश जी खटावलिया (T.G.T. अध्यापक) तथा दादाजी श्री रामप्रताप जी खटावलिया को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।
यह सफलता केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे गांव ढाणी मोहब्बतपुर की शान और सम्मान है। रितिका ने यह सिद्ध कर दिया कि लगन, अनुशासन और कड़ी मेहनत के सामने कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
रितिका की यह उपलब्धि उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो बड़े सपने देखते हैं। याद रखिए—
“मेहनत करने वाले ही इतिहास लिखते हैं, और वही अपने परिवार, गांव और देश का गौरव बढ़ाते हैं।”
ईश्वर से प्रार्थना है कि रितिका अपने चिकित्सा जीवन में निरंतर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करे और समाज की सेवा करते हुए अपने माता-पिता, गुरुजनों और पूरे गांव का नाम देशभर में रोशन करती रहे।
पूरे गांव की ओर से बेटी रितिका को उज्ज्वल भविष्य की ढेरों शुभकामनाएँ एवं हार्दिक बधाई।

हार्दिक शुभकामनाएँ
आरजू सूपुत्री श्री रामभगत छींपा
(गाँव सदलपूर ) जिला हिसार |
आईआईटी पटना में प्रवेश होने पर हृदय गर्व और प्रसन्नता से भर गया। यह सफलता बिटिया आरजू की कड़ी मेहनत,और लगन का सुंदर परिणाम है। आरजू super 100 की छात्रा थी |
परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि बेटी आरजू जीवन के हर पड़ाव पर नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करे |
परिवार, समाज का नाम रोशन करती रहे।
बिटिया एवं समस्त परिवार को गौरवपूर्ण उपलब्धि और उज्ज्वल भविष्य के लिए बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ ||

गांव शक्कर मदोरी में किसान की बेटी ने देशभर में लहराया परचम: बीएससी नर्सिंग में ऑल इंडिया 55वीं रैंक, NEET-2026 में भी 604 अंक हासिल कर बढ़ाया मान..
गांव शक्कर मंदोरी की आरजू सहारण की दोहरी सफलता, 680 अंकों वाली परीक्षा रद्द होने के बाद भी नहीं मानी हार; 12 से 15 घंटे पढ़ाई कर हासिल किया मुकाम…
आरजू सहारण ने *ऑल इंडिया बीएससी नर्सिंग प्रवेश परीक्षा* में *देशभर में 55वीं रैंक* हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव, क्षेत्र और जिले का नाम रोशन किया है। इसके साथ ही उसने NEET-2026 में 604 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया 8779वीं रैंक हासिल की है। एक साथ दो प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन ने आरजू को क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बना दिया है।
आरजू ने बताया कि NEET की पहली परीक्षा में उसके 680 अंक आए थे, लेकिन बाद में वह परीक्षा रद्द हो गई। यह किसी भी विद्यार्थी के लिए बड़ा झटका हो सकता था, लेकिन उसने निराश होने के बजाय अपनी तैयारी पहले से अधिक मजबूत कर दी। दोबारा पूरी लगन से परीक्षा की तैयारी की और फिर से उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए 604 अंक हासिल किए। आरजू का कहना है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी लगातार मेहनत करते रहने से मिलती है।
उन्होंने बताया कि बीएससी नर्सिंग लिए देशभर में करीब *1200 सीटों* पर प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। ऐसे कड़े मुकाबले में ऑल इंडिया 55वीं रैंक प्राप्त करना उनके लिए गर्व और खुशी का विषय है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के निरंतर सहयोग को दिया।
रोजाना 12 से 15 घंटे की पढ़ाई बनी सफलता की कुंजी…
आरजू ने बताया कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के दौरान प्रतिदिन 12 से 15 घंटे नियमित अध्ययन किया। समय का सही प्रबंधन, लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास ने उन्हें यह मुकाम दिलाया। उनका मानना है कि यदि लक्ष्य तय हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी सफलता दूर नहीं रहती।
खेती करने वाले पिता, स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत मां ने दिया पूरा सहयोग…
आरजू के पिता *सुभाष सहारण* खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि माता अनिता सहारण स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। माता-पिता के प्रोत्साहन और विश्वास ने आरजू को लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

दादा बोले- पोती ने पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया..
आरजू के दादा *भादर सहारण* ने कहा कि पोती की सफलता पूरे परिवार के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि एक साथ दो बड़ी परीक्षाओं में शानदार सफलता हासिल करना आसान नहीं होता। आरजू ने यह साबित कर दिया है कि मेहनत और दृढ़ संकल्प के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।
आरजू की सफलता ने यह संदेश दिया है कि ग्रामीण परिवेश की बेटियां भी कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। उनकी उपलब्धि निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ी के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
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