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गुरू जाम्भोजी ने विक्रम संवत् 1542 को कार्तिक वदि अष्टमी को #विसनोई धर्म की स्थापना की थी तथा ये धर्मयज्ञ कार्तिक अमावस्या तक चला था। इसकी याद में विसनोई धर्म के अनुयायी कार्तिक वदी अष्टमी से अमावस्या तक का सात दिवसीय पर्व मनाते है। यह पर्व विसनोई धर्म की परम्परा में ‘धर्म स्थापना सप्ताह’ के रूप में मनाया जाता है। यह सात दिवसीय पर्व विसनोई धर्म का सबसे बड़ा और पवित्र पर्व माना गया है। कार्तिक वदी अष्टमी के दिन इस पर्व का शुभारंभ होता है, जिसे विसनोई धर्म स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन गुरू जाम्भोजी की पवित्र ज्योति जलाकर इसका शुभारंभ होता है, अष्टमी से प्रारंभ होकर यह उत्सव सात दिनों तक चलता है। विसनोई घरों में अमावस्या तक अखंड ज्योति जलती रहती है। कार्तिक अमावस्या के दिन इस पर्व की पूर्णाहुति की जाती है। अमावस्या की संध्या को उस अखंड ज्योति से पुरे घर में और बाहर दीप प्रज्वलित करके विसनोईजन हर्षोल्लास से इस पर्व का समापन करते हैं। दीपों की यह ज्योति जाम्भाणी धर्म की प्रकाशमयी परम्परा का प्रतीक मानी जाती है। इस प्रकार यह सात दिवसीय “धर्म स्थापना सप्ताह” विसनोई धर्म के इतिहास, आस्था और संस्कृति का उत्सव है। अमावस्या को इस पर्व का समापन होता है। समापन दिवस की संध्या पर सभी विसनोई जन धर्म की अखंड ज्योति से (अपने घर में और बाहर) दिए जलाकर धर्म का प्रकाश फैलाते है।
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