
शब्द 84
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 *मूंड मुंडायो,मन न मुंडायो* समराथल धोरे पर संत मंडली के साथ बैठे एक सन्यासी ने गुरु जंभेश्वर महाराज से कहा कि उसने अपनी दाढ़ी मूंछ एवं सिर मुंडवा लिया है। सिर मुंडाने के बाद हर व्यक्ति योगी हो जाता है,तब उसे और क्या कुछ करने की आवश्यकता रह गई है? सन्यासी की बात सुन, गुरु महाराज ने यह शब्द कहा:- *मूंड मुंडायौ मन न मुंडायो मोह अबखल दिल लोभी* हे साधु ! तुमने मूँड तो मुँडाया परन्तु अपने मन…














