
सबद-22 : ओ३म् लो लो रे राजिंदर रायों, बाजै बाव सुवायो। आभै अमी झुरायो, कालर करसण कियो, नैपै कछू न कीयो।
“प्रसंग-दोहा” वरसंग आय अरज करी, सतगुरु सुणियें बात। तब ईश्वर कृपा करी, पीढ़ी उधरे सात। म्हारै एक पुत्र भयो, झाली बाण कुबाण। माटी का मृघा रचै, तानै मारै ताण। बरसिंग की नारी कहै, देव कहो कुण जीव। अपराध छिमा सतगुरु करो, कहो सत कहैं पीव। धाड़ेती गऊ ले चले, इक थोरी चढ़ियो बार। रूतस में प्रभू मैं भई, दृष्ट पड़यों किरतार। तब सतगुरु प्रसन्न भये, दुभध्या तजे न दोय। सत बात तुमने कही, सहजै मुक्ति होय। जांगलू धाम निवासी बरसिंग…














