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बीते कुछ समय से मीडिया के एक वर्ग ने बिश्नोई समाज को निशाना बनाने का एक ट्रेंड सा बना लिया है। कभी किसी व्यक्ति के गलत रास्तों के कारण पूरे समाज को ‘गैंग’ कहना, तो कभी पुरानी घटनाओं को कुरेदना। लेकिन क्या आपने कभी उस सिक्के का दूसरा पहलू देखा है? आज समय है उन तीन बड़े ‘मिथकों’ को तोड़ने का जिनका उपयोग हमारे समाज को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है।
1. एक व्यक्ति की पहचान, पूरे समाज की परिभाषा नहीं
आजकल हर जगह एक ही नाम (लॉरेंस बिश्नोई) को समाज से जोड़कर पेश किया जाता है। लेकिन क्या किसी एक व्यक्ति के कृत्यों के लिए सदियों पुराने संस्कारों वाले पूरे समुदाय को जिम्मेदार ठहराना सही है? बिश्नोई समाज का अस्तित्व हथियारों से नहीं, बल्कि गुरु जम्भेश्वर भगवान के 29 धर्म-नियमों से है। हमारा समाज शांति, अहिंसा और जीव-रक्षा का प्रतीक है, न कि अपराध का।
2. अपमान से सम्मान तक: दिनेश बिश्नोई की ऐतिहासिक जीत
कुछ साल पहले एक व्यक्ति की गलती (पेपर लीक मामला) की वजह से पूरे बिश्नोई समाज के युवाओं की योग्यता पर सवाल उठाए गए थे। समाज को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की कोशिश की गई। लेकिन हमने पलटकर जवाब पत्थर से नहीं, बल्कि ‘कलम’ से दिया।
हाल ही में दिनेश बिश्नोई ने RAS (राजस्थान प्रशासनिक सेवा) परीक्षा में टॉप करके उन सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया है। यह जीत केवल दिनेश की नहीं, बल्कि उस हर बिश्नोई युवा की है जिसने अपमान की आग को अपनी ताकत बनाया और मेहनत के दम पर सफलता हासिल की। आज हमारे युवा प्रशासनिक सेवाओं, शिक्षा और तकनीक में समाज का नाम रोशन कर रहे हैं।
3. परंपरा बनाम संकोच: घूंघट और महिला सशक्तिकरण का सच
जब विरोधियों को कोई मुद्दा नहीं मिला, तो उन्होंने दिनेश बिश्नोई की पत्नी को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उनके घूंघट (मर्यादा) को ‘महिला उत्पीड़न’ का नाम दिया गया।
सच क्या है? वह एक गृहिणी हैं और स्वभाव से बेहद शर्मीली (Shy) हैं। कैमरे के सामने उनकी झिझक उनकी व्यक्तिगत पसंद और स्वभाव था, न कि किसी का दबाव। बिश्नोई समाज में महिलाओं का स्थान सर्वोच्च है। अमृता देवी बिश्नोई, जिन्होंने पेड़ों के लिए सबसे पहले बलिदान दिया, वे हमारे समाज के साहस का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। हमारी संस्कृति में मर्यादा और आधुनिकता साथ-साथ चलती है। किसी की ‘निजता’ (Privacy) और ‘शर्मीले स्वभाव’ को ‘पिछड़ापन’ कहना संकुचित मानसिकता का प्रमाण है।
हमारा संदेश: हम झुकेंगे नहीं, हम बढ़ेंगे!
मीडिया के नकारात्मक नैरेटिव के बावजूद, बिश्नोई समाज आज भी पर्यावरण का रक्षक और देश का एक जिम्मेदार नागरिक बना हुआ है। हम अपनी परंपराओं का सम्मान करते हैं और शिक्षा के माध्यम से देश के विकास में योगदान दे रहे हैं।
सच्चाई को जानें, अफवाहों को नहीं।
“शिक्षित बनें, संगठित रहें और अपनी विरासत पर गर्व करें।”
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