
शब्द 58
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 *तउवा माण दुरर्योधन माण्यां* गुरु जंभेश्वर द्वारा पूर्व शब्द का सुनकर जमाती लोगों के मन में यह संदेह उत्पन्न हुआ कि क्या इस संसार से पार होना इतना कठिन है उन्होंने गुरु महाराज से जिज्ञासा प्रकट की कि क्या चार युगों में इस जन्म मरण के चक्कर से कोई जीव मुक्त हुआ है या नहीं?भक्त-जनों की जिज्ञासा जान गुरु महाराज ने यह शब्द कहा:- *तउवा माण दुर्धोधन माणया अवर भी माणत माणु* राज्य एवं धन दौलत के कारण मान…














