
सबद-12 : ओ३म् महमद महमद न कर काजी, महमद का तो विषम विचारूं।
‘दोहा‘‘ ‘फिर यो काजी बोलियो, फरमाई यह मुहमद। जम्भगुरु तब यों कही, इसका सुणियो सबद।’ फिर वह काजी कहने लगा-हे देव! यह जीव हत्या करना तो मुहमद साहब ने हम लोगों को बतलाया है, , तब जम्भेश्वर जी ने सबद उच्चारण किया। :: सबद-12 :: ओ३म् महमद महमद न कर काजी, महमद का तो विषम विचारूं। भावार्थ- अपने कुकर्मों पर परदा डालने के लिये हे काजी! तूं मुहमद का नाम बार-बार मत ले। तुम्हारे विचारों,कर्तव्यों से मुहम्मद का कोई मेल…














