
शब्द नं 116
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 आयसां मृगछाला पावोडी कायं फिरावो एक समय बहुत से नाथ योगी मृगीनाथ के नेतृत्व में गुरू जंभेश्वर महाराज के पास समराथल पर उनकी परीक्षा करने आये।मृगीनाथ ने अपने तंत्र- बल के आधार पर मृग छाला और पावोड़ी को ऊपर आकाश में हवा में नचाना आरंभ किया और अभिमान में भरकर कहा कि उसके सम्मान कोई और सिद्धि पुरूष एवं चमत्कारी नहीं है। उसने चुनौती के स्वर में जांभोजी महाराज से कहाकि यदि उनमें कोई शक्ति या चमत्कार हो तो…







