
जाम्भोजी जन्म कथा
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सुगरा प्रथा क्या है?
Renu Bishnoi किसी अन्य मत/सम्प्रदाय/पंथ/धर्म के अनुयायीयों को अपने मत/सम्प्रदाय में दीक्षित करने की परम्परा को नाम-दीक्षा, नाम-दान, नाम-लेना आदि के नाम से जाना जाता है। इस प्रक्रिया में एक गुप्त नाम/मंत्र किसी डेरे, आश्रम, मठ, पीठ आदि से संबंधित डेरा प्रमुख, धर्म-गुरु, महंत, पीठाधीष आदि द्वारा उस व्यक्ति को दिया जाकर अपने पंथ में शामिल कर लिया जाता है । और इस विधि से दीक्षित वह व्यक्ति अपने पूर्व मत के धर्म सिद्धान्तों का परित्याग कर उस नवीन मत…

जाम्भाणी संत सूक्ति
परमानन्दजी वणियाल जो करता सोइ भोग्यता, आडो आवत सोय। अपणौ कीयो भोगवै, हरि कूं दोस न कोय। भावार्थ जीव जैसा कर्म करता है वैसा ही उसे फल मिलता है, अपने बुरे कर्मों का फल भोगते समय भगवान को दोष नहीं देना चाहिए।

🌺 जाम्भाणी संत सूक्ति 🌺
परमानन्दजी वणियाल विष वेली अपणै कर वाहै,इम्रत फल कैसे पाई।करै जका लेखा हरि मांगै,जदि जीवड़ो पछताई भावार्थ अपने हाथ से जहर की बेल बोई है तो उसके अमृत फल कहां से लगेंगे।जीवन भर पापकर्मों में रत रहने के बाद मरणोपरांत सद्गति की इच्छा करना बेकार है।किये हुए कर्मों का हिसाब जब भगवान लेता है तो पापी जीव बहुत पछताता है।

प्रकाश बिश्नोई को गोल्ड मैडल
यह रंग यूँ ही नहीं है हवाओं में घुले है इसमें मेहनत के मोती भी…. हौसला जब आसमां सा हो तो शिखर को छूआ जा सकता है। इसी हौसले , लग्न और निष्ठा के बूते सूर्यनगरी जोधपुर के एकलखोरी गाँव के निवासी प्रकाश बिश्नोई ने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर से बी ए ( ओनर्स) इतिहास में पहली वरीयता हासिल की। उनकी इस उपलब्धि पर जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के 15 वें दीक्षान्त समारोह में उन्हें गोल्ड मैडल दिया गया। उन्हें…

खिलते पुष्प : निरिक्षा बिश्नोई भारतीय नेवी ऑफिसर
परिचय राजस्थान के जिले के छोटे से गांव मैनांवाली की 24 साल की निरिक्षा बिश्नोई नेवी में ग्रुप वन गजटेड आॅफिसर सिलेक्ट हुई हैं। निरिक्षा देश की 23 वुमन कैडेट के साथ 22 नवंबर को पास आउट हुई है। नेवी में लड़कियों का बतौर कमिशन ऑफिसर शामिल होना बड़ी चुनौती है, लेकिन निरिक्षा ने इस चैंलेज को एक्सेप्ट कर यह अचीवमेंट हासिल किया। निरिक्षा के पिता एसबी बिश्नोई इस वक्त नागालैंड में आर्मी में कर्नल हैं। लड़कों के साथ भी…

राव करीजै रंक
अल्लूजी कविया ” राव करीजै रंक,रंकासिर छत्र धरीजै।अल्हू आस वैसे सार,आस कीजै सिंवरीजै।चख लहै अंध पंगा चलण,मौनी सिधायक वयण।तो करता कहा न होय,नारायण पंकज नयण। भावार्थ ‘ राजा को रंक तथा रंक को राजा करने वाला,अंधे को आंख देने वाला,पंगू को चलाने वाला, गूंगे को वाणी प्रदान करने वाला कमलनयन नारायण हरि सर्वशक्तिमान है।वे ही मूल है, उन्हीं की आशा करनी चाहिए और उन्हीं का स्मरण करना चाहिए।’

🌸 जाम्भाणी संत सूक्ति 🌸
🌸 जाम्भाणी संत सूक्ति 🌸 “देखण के दिन दोय छबीला, जिसा काच का सीसा। यो तन मोती ओस का, तुम क्युं न भजो जगदीसा। -(उदोजी अड़ींग)-भावार्थ-‘ यह शरीर कांच के शीशे की तरह नाजुक और ओस की बूंद की क्षणभंगुर है। ऐसे अल्पकालिक जीवन को पाकर तुम भगवान का भजन क्यों नहीं करते? 🙏 -R. K.🙏

जाम्भाणी संत सूक्ति
” तुंही सांम सधीर,धर अंबर जण धरियो।तरे नाम गजराज,ध्रुव पहळाद उधरियो।परीखत अमरीख पर,भगतां पर पाळे।संखासर संघार,वेद तैं ब्रह्मा वाळे।सुर परमोधण तारण संतां,वरण तूझ अवरण वरूं।उबारियो अलू आयो सरण,जै ओं देव झांभेसरूं।-(अल्लूजी कविया) भावार्थ ‘ धरती और आकाश को धारण करने वाले हे भगवन!आपके नाम के प्रताप से गजेन्द्र, ध्रुव, प्रहलाद,परिक्षित,अंबरीश तर गए।असुरों का संहार करने,ब्रह्माजी को वेद प्रदान करने, देवताओं को आल्हादित करने एवं संतों का उद्धार करने वाले भगवन इस बार आप जम्भेश्वर अवतार के रूप में आए हैं,…

शब्द 76
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 *तन मन धोईये -संजम होइये* अजमेर के मल्लूखान ने जाम्भोजी से निवेदन किया कि जब से वह उनके बताए रास्ते पर चलने लगा है,तब से उसका जीवन और ज्यादा दुखी हो गया है और दूसरी तरफ अच्छे कर्मों की अपेक्षा करने वाले लोग मौज कर रहे हैं। मल्लूखान ने जब कहा कि उसकी जाति के लोग उसका अपमान करते हैं।ऐसी स्थिति में वह उनके बताए रास्ते पर कैसे चले? खान की कठिनाई जान गुरु महाराज ने उसके प्रति यह…

🌸 जाम्भाणी संत सूक्ति 🌸
” एकळवाई थळ सिर ऊभो,केवळ ग्यांन कथै करतार।सुरग देवंण आयो सुचियार,विसंन जपौ दसवैं अवतार।त्रिषा नींद षुध्या तिस नांहीं,जोवो भगतौ आळीगार।आदि विसंन संभरथळ आयौ,लंक तंणों गढ़ लेवंणहार।-(कान्होजी) भावार्थ स्वम्भू भगवान श्री जम्भेश्वर समराथल पर विराजमान होकर कैवल ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। भगवान विष्णु के दसवें अवतार के रूप में अपने सच्चे भक्तों के उद्धार के लिए भगवान आए हैं। भूख-प्यास रहित उनके चिन्मय गुणों से अलंकृत स्वरूप का भक्तो तुम दर्शन करो।त्रैतायुग में लंका विजय करने वाले राम यही है।…

बिश्नोई धर्म प्रश्नावली
*प्रश्न1.जांभोजी कितने वर्ष तक मौन रहे ?**उत्तर 1:-7 वर्ष तक मौन रहे ।**प्रश्न2. जांभोजी ने कितने वर्ष तक गायों को चराई थी ?**उतर 2:-27 वर्ष**प्रश्न 3:- जांभोजी ने कितने वर्ष तक शब्द सुनाएं ?**उतर 3:- 51 वर्ष तक शब्द सुनाए थे !!**प्रश्न 4.जांभोजी ने किस पंथ की स्थापना की ?**उत्तर 4:- विश्नोई पंथ !!**प्रश्न 5. जांभोजी में पंथ की स्थापना कब की ?**उत्तर 5:- विक्रम संवत 1542ई.में !!**प्रश्न 6:- जांभोजी की माता का नाम बताईये ?**उतर 6:- हंसा देवी**प्रश्न 7:-भगवान…



