



IAS डाँ. सीमा बिश्नोई
IAS मेँ चयन साचौर कि लाडली डाँ. सीमा बिश्नोई को बहुत बहुत बधाई। आप भी बधाई दीजियेगा सीमा जी को। . भारतीय प्रशासनिक सेवा आई ऐ एस का परिणाम गुरुवार को घोषित हुआ। बिश्नोई का चयन होने से खु:शी लहर हैं ,सिणधरी ब्लाँक में आड़ेल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नियुक्त डाँ सीमा बिश्नोई ने आईएएस मैन के परिणामों में 580 रैंक हासिल की है। डाॅ. बिश्नोई के पति डाॅ. कुणाल बिश्नोई भी चिकित्सा विभाग में नियुक्त हैं और वे…

शुक्लहंस शब्द नं 67
श्री गढ़ आल मोत पुर पाटण दूणपुर गाँव का वासी मोती मेघवाल और उसकी पत्नी दोनों बिश्नोई बन गए। उन्होंने चमार का काम छोड़ दिया। वे साधुओं जैसा जीवन जीने लगे। ग्राम ठाकुर बीदा जोधावत को मोती का वह व्यवहार बहुत बुरा लगा। ठाकुर ने मोती को बुलाकर उसे कैद में डालने का हुक्म दिया तथा कहा कि वह अपने इष्टदेव से मदद लेना चाहे तो उसे चार पहर की छूट दी जाती है ।उस संकट की घड़ी में मोती…


शब्द नं 68
बै कंवराई अनंत बधाई बीकानेर के राव लूणकरण ने गुरु जांभोजी की स्तुति की ओर जैसे ही चरण स्पर्श हो चुके, जाम्भोजी ने अपना हाथ उनके सिर पर रख कर उन्हें आशीर्वाद दिया।उसी समय राव का पुत्र पास ही अपना घोडा फेर रहा था तथा अनेक प्रकार के अश्वसंचालन के कौशल दिखा रहा था।उसे देख कर जमाती लोगों ने कुंवर की बड़ी प्रशंसा की तथा उन्होंने जब कहा कि ऐसा अश्व चालक और कोई नहीं देखा। राजकुंवर के अहंकार को…

खिलते पुष्प : सुरेश भादू बिशनोई शूटिंग
सुरेश भादू s/o स्वर्गीय श्री हंसराज भादू निवासी रावतखेरा हिसार हरियाणा का सिलेक्शन नेशनल शूटिंग टीम में हुआ है। पूरे समाज की तरफ से आपको लख लख बधाई । आप आगे बढते रहें और समाज के युवाओ के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बने रहें। धन्यवाद।



5. मुक्ति धाम मुकाम
यह बीकानेर जिल की नोखा तहसील में हैं जो नोखा से लगभग 16 कि.मी. दूर हैं। यहांपर गुरू जाम्भोजी की पवित्र समाधि हैं। इसी कारण समाज में सर्वाधिक महत्त्व मुकाम का ही हैं। इसके पास ही पुराना तालाब गांव हैं। कहा जाता हैं कि गुरू जाम्भोजी ने अपने स्वर्गवास से पूर्व समाधि के लिये खेजड़े एवं जाल के वृक्ष को निशानी के रूप में बताया और कहा था कि वहां 24 हाथ की खुदाई करने पर शिवजी का धुणा एवं…

शब्द नं 69
जवंरा रे तैं जग डांडीलो कल की शेष व्याख्या से आगे काचा तोड़ निकूचा भाषै, अधट घटै मल माणों। वे कच्ची आयु के बालकों की देह से भी उनके प्राण छीनकर उन्हें पूरा ही निगल जाते हैं। शरीर से रहित होने पर बड़े-बड़े बलशालियों के बल का अभिमान भी उन यम दूतों के सामने चूर- चूर हो जाता है। धरति अरू असमान अगोचर, जातै जीव न देही जाणौं । ये यमदूत इस धरती पर और आसमान में विचरण करते हुए…



