
शब्द 76
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 *तन मन धोईये -संजम होइये* अजमेर के मल्लूखान ने जाम्भोजी से निवेदन किया कि जब से वह उनके बताए रास्ते पर चलने लगा है,तब से उसका जीवन और ज्यादा दुखी हो गया है और दूसरी तरफ अच्छे कर्मों की अपेक्षा करने वाले लोग मौज कर रहे हैं। मल्लूखान ने जब कहा कि उसकी जाति के लोग उसका अपमान करते हैं।ऐसी स्थिति में वह उनके बताए रास्ते पर कैसे चले? खान की कठिनाई जान गुरु महाराज ने उसके प्रति यह…












