
शब्द 75
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 *जोगी रे.तू जुगत पिछाणी* एक समय अजमेर के मल्लूखान ने जाम्भोजी से कहा कि उनकी किताब में मांस खाने की मनाही नहीं है।मोहम्मद साहब ने भी माँस खाना वर्जित नहीं माना है। मांस खाने की बात सुन गुरु महाराज ने उपस्थित मंडली के योगियों,काजियों एंव मल्लूखान के प्रति यस शब्द कहा:- *जोगी रे तूं जुगत पिछांणी काजी रे तूं कलम कुराणी* हे योगी!तुम योग की विधि और उसका रहस्य समझो।योग का अर्थ है व्यक्ति चेतना को परम चेतना से…













