
जाम्भाणी संत सूक्ति
“जाता वार न लागै जीव कूं, नहीं भरोसा तन का। सांसो सांस सिंवर ले साहब, छाड़ मनोरथ मन का। -(उदोजी अड़ींग) -भावार्थ-‘ यह शरीर नश्वर है, इसके नष्ट होते देर नहीं लगेगी, इसलिए एक भी श्वास व्यर्थ मत गंवा और भगवान का स्मरण कर।मन के मते अनुसार नहीं चलना चाहिए। -(जम्भदास)












