
डॉ.अलका बिश्नोई
डॉ.अलका बिश्नोई पुत्री कैलाश जी बिश्नोई (मुकाम) अधीक्षंण अभियंता जेवीवीएनएल की (NEET-SS 2020) नीट सुपर स्पेसलिटी में ऑल इंडिया में 69 रैंक आने पर बिशनोई धर्म प्रकाश एप परिवार की ओर से हार्दिक बधाई व उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं।
धर्म प्रकाश
धर्म प्रकाश

डॉ.अलका बिश्नोई पुत्री कैलाश जी बिश्नोई (मुकाम) अधीक्षंण अभियंता जेवीवीएनएल की (NEET-SS 2020) नीट सुपर स्पेसलिटी में ऑल इंडिया में 69 रैंक आने पर बिशनोई धर्म प्रकाश एप परिवार की ओर से हार्दिक बधाई व उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं।

: शब्द २ ::ओउम मोरे छायान माया लोह न मांसु । रक्तुं न धातुं । मोरे माई न बापुं । रोही न रांपु । को न कलापुं । दुख; न सरापुं । लोंई अलोई । तयुंह त्रुलाइ । ऐसा न कोई । जपां भी सोई।जिहीं जपे आवागवण न होई । मोरी आद न जाणत । महियल धुं वा बखाणत । उरखडा- कले तॄसुलुं । आद अनाद तो हम रचीलो, हमे सिरजीलो सैकोण । म्हे जोगी कै भोगी कै अल्प अहारी…

ओ3म् मोरें अंग न अलसी तेल न मलियों, ना परमल पिसायों। हे वीदा! मेरे इस शरीर पर किसी भी प्रकार का अलसी आदि का सुगन्धित तेल या अन्य पदार्थ का लेपन नहीं किया गया है क्योंकि मैं यहां सम्भराथल पर बैठा हुआ हूं। यहां ये सुगन्धित द्रव्य उपलब्ध भी नहीं है और न ही इनकी मुझे आवश्यकता ही है। जीमत पीवत भोगत विलसत दीसां नाही, म्हापण को आधारूं। पृथ्वी का गुण गन्ध है जो भी पार्थिव पदार्थों का शरीर रक्षा…

धरण कान्हावत बूझियो, जम्भगुरु से भेव। आपरी उमर थोड़ी दीसै, किता दिना रा देव। जो बूझयों सोई कह्यो , अलख लखायोंोो भेव। धोखा सभी गमाय के, शब्द कह्यो जम्भदेव। कान्हाजी के पुत्र उधरण ने फिर पूछा- हे देव! आपने बातें तो बहुत ही अच्छी बतलायी ऐसा मालूम पड़ता है कि आपने बहुत वर्षों तक विद्याध्ययन किया है किंतु आपकी आयु तो बहुत ही थोड़ी दिखाई देती है, आप कितने वर्षों के हैं। तब गुरु जांभो जी ने जैसा पूछा था…

उधरण कान्हावत यूं कहै, जाम्भाजी सूं बात।जाप कुणा रो थे जपो, हमें बताओं तात।अर्थात:कान्हाजी के पुत्र उधरण ने इससे पूर्व शब्द द्वारा आयु का ज्ञान प्राप्त कर के फिर दूसरा प्रश्न पूछा कि हे देव ! आप जप किस का करते हैं, हमें भी बतलायें कि हम किस देवता का जप-नाम स्मरण उपासना करें। गुरू जाम्भोजी ने शब्दोच्चारण इस प्रकार से किया – :: शब्द – 5 :: ओउम अइयालो अपरंपर बाणी,महे जपां न जाया जीयूं।| हे संसार के…

उधरण कान्हावत यूं कहै, दोय कहै छै देव। भिन्न भिन्न समझाइयों, हमें बतावों भेव। उधरण राजपुत्र ने इससे पूर्व तीन शब्दों को ध्यान पूर्वक श्रवण किया तब यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि जीव और ब्रह्या एक ही हैं या दो भिन्न-भिन्न है। इस शंका के समाधानार्थ उधरण ने प्रार्थना की। गुरु महाराज ने उत्तर दिया- :: शब्द -6 ::√ ओउम भवन भवन म्हें एका जोती, चुन चुन लिया रतना मोती।भावार्थ- सम्पूर्ण चराचर सृष्टि के कण-कण में परम तत्व रूप परब्रह्या…

ॐ हिन्दू होय कै हरि क्यूं न जंप्यों, कांय दहदिश दिल पसरायों। भावार्थ- हिन्दू होने का अर्थ है कि भगवान विष्णु से सम्बन्ध स्थापित करना। विष्णु निर्दिष्ट मार्ग का अनुसरण करना तथा विष्णु परमात्मा का अनुमान करना, तथा विष्णु परमात्मा का स्मरण करना। यदि हिन्दू होय कर यह कर्तव्य तो किया नहीं और मन इन्द्रीयों को दसों दिशाओं में भटकाते रहे तो फिर तुम कैसे हिन्दू हो सकते थे। सोम अमावस आदितवारी, कांय काटी बन रायों।आप लोग हिन्दू होकर भी…

ओझ्म् सुण रे काजी सुण रे मुल्ला, सुण रे बकर कसाई। भावार्थ- भावार्थ-बकरी आदि निरीह जीवों की हत्या करने वाले कसाई रूपी काजी, , मुल्ला तुम लोग मेरी बात को ध्ध्यान पूर्वक श्रवण करो। किणरी थरपी छाली रोसो, किणरी गाडर गाई। किस महापुरूष पैगम्बर ने यह विध्धान बनाया है कि तुम काजी मुल्ला मुसलमान या हिन्दू मिलकर या अलग-अलग इन बेचारी भेड़-बकरी और माता तुल्य गऊ के गले पर छुरी चलावो अर्थात् ऐसा विध्धान किसी ने नहीं बनाया तुम मनमुखी…

ओ३म् दिल साबत हज काबो नेड़ै, क्या उलबंग पुकारो। भावार्थ- यदि तुम्हारे दिल शुद्ध सात्विक विकार रहित है तो तुम्हारे काबे का हजा नजदीक ही है अर्थात् हृदय ही तुम्हारा काबै का हज है तो फिर क्यों मकानों की दिवारों पर चढ़कर ऊंची आवाज से उस अल्ला की पुकार करते हो, , यह तुम्हारी बेहूदी उलबंग तुम्हारा अल्ला नहीं सुन सकेगा क्योंकि वह अल्ला तो तुम्हारे दिल में ही है। भाई नाऊ बलद पियारो, ताकै गलै करद क्यूं सारों। अपने…

ओ३म् विसमिल्ला रहमान रहीम, जिहिं कै सदकै भीना भीन। भावार्थ- विसमिल्ला तो रहम-दया भाव रखने वाले स्वयं विष्णु अवतारी राम ही है। उनका मार्ग तो तुम्हारे से भिन्न ही था। वर्तमान में तुमने जो जीव हत्या का मार्ग अपना रखा है यह तुम्हारा मनमुखी है। उनको बदनाम मत करो। तो भेटिलो रहमान रहीम, करीम काया दिल करणी। सभी पर रहम करने वाले श्री राम एवं गोपालक श्री कृष्ण को दिल रूपी हृदय गुहा में स्थिर करके फिर कोई शुभ कार्य…

ओ३म् दिल साबत हज काबो नैड़ै, क्या उलबंग पुकारो। भावार्थ- यदि तुम्हारे दिल में सच्चाई है तो काबे की हज निकट ही है। जब तुम्हारा अपना अन्तःकरण नजदीक ही है तो फिर उसे दूर समझकर इतनी जोर से आवाज क्यों लगाते हो क्योंकि वह अल्ला तो तुम्हारे दिल में ही है। सीने सरवर करो बंदगी, हक्क निवाज गुजारो। उस परमपिता परमात्मा की प्राप्ति करना चाहते हो तो हृदय में प्रेम और दीनता से पुकार करो यही सच्ची प्रार्थना होगी। प्रतिदिन…

‘दोहा‘‘ ‘फिर यो काजी बोलियो, फरमाई यह मुहमद। जम्भगुरु तब यों कही, इसका सुणियो सबद।’ फिर वह काजी कहने लगा-हे देव! यह जीव हत्या करना तो मुहमद साहब ने हम लोगों को बतलाया है, , तब जम्भेश्वर जी ने सबद उच्चारण किया। :: सबद-12 :: ओ३म् महमद महमद न कर काजी, महमद का तो विषम विचारूं। भावार्थ- अपने कुकर्मों पर परदा डालने के लिये हे काजी! तूं मुहमद का नाम बार-बार मत ले। तुम्हारे विचारों,कर्तव्यों से मुहम्मद का कोई मेल…