
सबद-27 ओ३म् पढ़ कागल वेदूं, शास्त्र शब्दूं, पढ़ सुन रहिया कछू न लहिया। नुगरा उमग्या काठ पखाणों,कागल पोथा ना कुछ थोथा,ना कुछ गाया गीयूं |
ओ३म् पढ़ कागल वेदूं, शास्त्र शब्दूं, पढ़ सुन रहिया कछू न लहिया। नुगरा उमग्या काठ पखाणों,कागल पोथा ना कुछ थोथा,ना कुछ गाया गीयूं | भावार्थ- कागज द्वारा निर्मित वेद, शास्त्र और संत-महापुरूषों के शब्दों को आप लोगों ने पढ़ा है तथा प्रतिदिन पढ़ते भी आ रहे हैं तथा कुछ लोग सुनते भी हैं। किन्तु जब तक पढ़ सुनकर भी कुछ प्राप्ति नहीं करोगे तो कुछ भी लाभ नहीं है। जैसे अनपढ़ अज्ञानी थे वैसे ही पढ़-सुनकर रह गये तथा कुछ…













