
सबद-23 ओ३म् साल्हिया हुवा मरण भय भागा, गाफिल मरणै घणा डरै
‘प्रसंग-8 दोहा’ विष्णु भक्त गुंणावती, रहे जूं तेली जात। विश्नोई धर्म आचरै, जम्भेश्वर किया पात। एक मृघा और तेल पे, आठ सै एक हजार। खड़े सकल वानै चढ़ै, वह्या करारी धार। थलसिर हरखे देवजी, साथरियां बूझे बात। भाग खुलै किस जीव के, कहिये दीना नाथ। गुणावती नगरी निवासी तेली जाति के कुछ व्यक्ति थे। वे तिलों से तेल निकालने का कार्य करने वाले तथा भगवान विष्णु के उपासक थे। उन्हें सुजीव समझकर श्री देवजी ने पाहल देकर पवित्र किया और…














