Sanjeev Moga

Sanjeev Moga

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12वीं के बाद बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई के विभिन्‍न आयाम

वैसे तो बिजनेस मैनेजमैंट की पढ़ाई 12वीं की सभी स्ट्रीम के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध है परंतु इसे अधिकतर वाणिज्य यानि कॉमर्स से जोड़कर भी देखा जाता है | वाणिज्य क्या है ? वाणिज्य मानव जीवन के जीवन यापन की मूलभूत आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान से संबंधित है। प्राचीन काल से मनुष्य वस्तुओं के आदान-प्रदान से एक दूसरे की जरूरतों को है पूरी करता रहा है। फिर मुद्रा के माध्यम से विनिमय मैं होने लगा,जिससे मुद्रा के संकलन करने,…

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खिलते पुष्प (April 2023)

डॉ. शिवदीप बिश्नोई सुपुत्र श्री कृष्ण कुमार | देहडू निवासी गांव चपला मोरी, तहसील व जिला फतेहाबाद, हरियाणा का चयन महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा में जूनियर रेसिडेंट (JR) के पद पर हुआ है । रमन धारनियां सुपुत्र श्री बलराम धारनियां, निवासी गांव भूना, जिला फतेहाबाद का चयन उत्तर प्रदेश पुलिस में उप-निरीक्षक के पद पर हुआ है। सुभाष चंद्र सुपुत्र स्व. श्री मांगे राम भाम्भू, निवासी सदलपुर, हिसार की पदोन्नति शिक्षा विभाग में प्राचार्य पद सेखंड शिक्षा अधिकारी के…

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बिश्नोई समाज की इस बेटी का योग देख कर दांतो तले ऊँगली दबाने को मजबूर हो जाओगे

भाकरासनी की महज 7 साल और 7 महीने की परिणीति की पहचान अब योगा एक्सपर्ट के रूप में है। वर्ल्ड लेवल पर हुए टैलेंट शो में अवार्ड हासिल कर चुकी परिणीति ढाई साल में 5 हजार से ज्यादा बच्चों को योग सिखा चुकी है और कई स्कूलों में तो हर सप्ताह में एक दिन 2 घंटे योगा टीचर के रूप में क्लासेज ले रही हैं। पिता रामचंद्र विश्नोई अपनी होनहार बेटी को रोज एक्सरसाइज के साथ नए-नए टिप्स भी दे…

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सोनू धायल, स्कूल व्याख्याता , राजनीति विज्ञान, पद पर चयन होने पर हार्दिक बधाई

#सोनू पुत्री स्वर्गीय श्री मनफूल सिंह जी धायल निवासी कोलायत (नायब तहसीलदार) का #स्कूल_व्याख्याता , राजनीति विज्ञान, पद पर चयन होने पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की अग्रिम शुभकामनाएँ।

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राजेश बिश्नोई ETT Teacher Punjab

श्री गुरु जंभेश्वर भगवान की असीम कृपा से #राजेश_बिश्नोई सुपुत्र श्रीमति मानती देवी एवं श्री धर्मपाल जी बिश्नोई (निवासी- जिला हिसार तहसील आदमपुर के गांव सदलपुर हरियाणा) का ETT Teacher Punjab मैं चयनित होने पर  हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

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श्री गुरु जम्भेश्वर चालीसा 

ओउम नमों गुरुजम्भ्जी, चरण नवांऊ शीश | पर ब्रह्मपरमात्मा, पूर्णविश्वा बिश |जय गुरु जम्भेश्वर जय गुरु दैया | सत चित आनन्द अलख अभेवा ||१||लोहट घर अवतार धरया | माता हंसा लाड लडाया ||२||सकल सुष्टि के तुम हो स्वामी | घट-घट व्यापक अन्तर्यामी ||३||ब्रह्मा, विष्णु अरु महादेवा | ये सब करै आपकी सेवा ||४||सुरनर मुनिजन ध्यान लगावै | अलख पुरुष थारो भेद न पावे ||५||हाड, मांस,लोहू नहीं काया | आप ही ब्रहम आप ही माया ||६||दस अवतार आप ही धारा |…

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अमावस्या व्रत कथा

सर्वप्रथम गुरूदेव की वन्दना करता हूं, क्योंकि गोविन्द से भी गुरू महान है। गुरू को प्रणाम करने के पश्चात् सभी सन्तों को प्रणाम करता हूं। तत्पश्चात् विष्णु परमात्मा को नमन करता हूं, क्योंकि विष्णु को प्रणाम करने से व्याधि शारीरिक रोग-कष्ट मिट जाते है तथा मानसिक बीमारियां भी जिनकी वन्दना करने से नष्ट हो जाती है। जिस विष्णु की कृपा के प्रताप से हृदय में ज्ञान का प्रकाश हो जायेगा। अनेक जन्मों के किये हुए पाप कर्म कट जायेंगे और…

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Surya riding on 7 horses chariot

रविवार: व्रत विधि, कथा एवं आरती

सूर्यदेव की दो भुजाएँ हैं, वे कमल के आसन पर विराजमान रहते है ; उनके दोनों हाथों में कमल सुशोभित हैं। उनके सिर पर सुन्दर स्वर्ण मुकुट तथा गले में रत्नों की माला है। उनकी कान्ति कमल के भीतरी भाग की-सी है और वे सात घोड़ों के रथ पर आरूढ़ रहते हैं। सूर्य देवता का नाम सविता भी है, जिसका अर्थ है- सृष्टि करने वाला ‘सविता सर्वस्य प्रसविता’ । ऋग्वेद के अनुसार आदित्य-मण्डल के अन्तःस्थित सूर्य देवता सबके प्रेरक, अन्तर्यामी तथा परमात्मस्वरूप…

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Lord Shiva

सोमवार (चंद्रमा) : व्रत विधि, कथा एवं आरती

चन्द्रदेव का वर्ण गौर है। इनके वस्त्र, अश्व और रथ तीनों श्वेत हैं। ये सुन्दर रथ पर कमल के आसन पर विराजमान हैं। इनके सिर पर सुन्दर स्वर्ण मुकुट तथा गले में मोतियों की माला है। इनके एक हाथ में गदा है और दूसरा हाथ वर मुद्रा में है। श्रीमद् भागवत के अनुसार चन्द्रदेव महर्षि अत्रि और अनसूया के पुत्र हैं। इनको सर्वमय कहा गया है। ये सोलह कलाओं से युक्त हैं। इन्हें अन्नमय, मनोमय, अमृतमय पुरूषस्वरूप भगवान् कहा जाता…

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मंगलवार (मंगल) : व्रत विधि, कथा एवं आरती

मंगल देवता की चार भुजाएँ हैं। इनके शरीर के रोयें लाल हैं। इनके हाथों में क्रम से अभयमुद्रा, त्रिशूल, गदा और वरमुद्रा है। इन्होंने लाल मालाएँ और लाल वस्त्र धारण कर रखे हैं। इनके सिरपर स्वर्ण मुकुट है तथा ये मेष (भेड़ा) के वाहन पर सवार हैं। वाराह कल्प की बात है। जब हिरण्यकशिपुका बड़ा भाई हिरण्याक्ष पृथ्वी को चुरा ले गया था और पृथ्वी के उद्धार के लिये भगवान् ने वाराहावतार लिया तथा हिरण्याक्ष को मारकर पृथ्वी देवी का…

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बुधवार: व्रत विधि, कथा एवं आरती

बुध पीले रंग की पुष्पमाला तथा पीला वस्त्र धारण करते हैं। उनके शरीर की कान्ति कनेर के पुष्प की जैसी है। वे अपने चारों हाथों में क्रमशः – तलवार, ढाल, गदा और वरमुद्रा धारण किये रहते हैं। वे अपने सिर पर सोने का मुकुट तथा गले में सुन्दर माला धारण करते हैं। उनका वाहन सिंह है। अथर्ववेद के अनुसार बुध के पिता का नाम चन्द्रमा और माता का नाम तारा है। ब्रह्माजी ने इनका नाम बुध रखा, क्योंकि इनकी बुद्धि…

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वीरवार: व्रत विधि, कथा एवं आरती

देव गुरू बृहस्पति पीत वर्ण के हैं। उनके सिर पर स्वर्ण मुकुट तथा गले में सुन्दर माला है। वे पीत वस्त्र धारण करते हैं तथा कमल के आसन पर विराजमान हैं। उनके चार हाथों में क्रमशः – दण्ड, रूद्राक्ष की माला, पात्र और वरदमुद्रा सुशोभित है। महाभारत आदिपर्व एवं तै. सं. के अनुसार बृहस्पति महर्षि अड़िग्रा के पुत्र तथा देवताओं के पुरोहित हैं। ये अपने प्रकृष्ट ज्ञान से देवताओं को उनका यज्ञ-भाग प्राप्त करा देते हंै। असुर यज्ञ में विघ्र…

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