
श्री गुरु जम्भेश्वर चालीसा
ओउम नमों गुरुजम्भ्जी, चरण नवांऊ शीश | पर ब्रह्मपरमात्मा, पूर्णविश्वा बिश |जय गुरु जम्भेश्वर जय गुरु दैया | सत चित आनन्द अलख अभेवा ||१||लोहट घर अवतार धरया | माता हंसा लाड लडाया ||२||सकल सुष्टि के तुम हो स्वामी | घट-घट व्यापक अन्तर्यामी ||३||ब्रह्मा, विष्णु अरु महादेवा | ये सब करै आपकी सेवा ||४||सुरनर मुनिजन ध्यान लगावै | अलख पुरुष थारो भेद न पावे ||५||हाड, मांस,लोहू नहीं काया | आप ही ब्रहम आप ही माया ||६||दस अवतार आप ही धारा |…














