
शब्द 91
शब्द नं 91 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 *छंदे मंदे बालक बुद्धे* फलोदी शहर के राव हमीर के दरबार में एक राजपूत बाजीगर आया तथा उसने राव को अपनी कलाबाजी का खेल दिखाने के लिए अपनी स्त्री को राव हमीर के सुरक्षित निवास स्थान में रखने को कहा तथा बतलाया कि वह सूर्य की किरणों के सहारे आकाश मंडल में जा रहा है। राव ने उसकी स्त्री को निवास में भेज दिया। वह बाजीगर एक कच्चे धागे को ऊपर फेंक कर खुद उसके सहारे…


शब्द नं 92
*काया कोट पवन कुटवाली* एक समय की बात है, एक वेद पाठी-योगी गुरु जंभेश्वर के पास समराथल आया। उसने जब गुरु महाराज के क्रिया- कलाप देखे,तब वह यह जानकर बड़ा प्रभावित हुआ कि बिना वेद शास्त्र पढ़े,कोई कैसे ऐसी विवेक पूर्ण बातें बतला सकता है। उस योगी ने जब जांभोजी से इन बातों का रहस्य जानना चाहा, तब गुरु महाराज ने उसे यह शब्द कहा:- *काया कोट पवंण कुट वाली कुकरम* *कुलफ बणायौ* हे जिज्ञासु जोगी! यह मानव शरीर एक…




शब्द 93
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 *ओम् आद शब्द अनाहद बाणी* एक समय की बात,जोधपुर नरेश राव मालदेव समराथल धोरे पर आये और उन्होंने गुरु जंभेश्वर भगवान के सम्मुख जिज्ञासा प्रकट की कि सृष्टि के आदि काल में कौन देवता उत्पन्न हुआ? मालदेव की जिज्ञासा जान,गुरु महाराज ने उसे यह शब्द कहा:- *ओम आदि सबद अनाहद वांणी चवदै* *भूवन रहया छल पांणी* हे जिज्ञासु! जिस समय यह सृष्टि रची,उससे पहले इस संपूर्ण ब्रह्मांड में एक अनहद-नाद, अनहत ध्वनि,शाश्वत नाद परिव्याप्त था। परमब्रह्म, सदाशिव के उस…


शब्द नं 94
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 सहस्त्र नाम साई भल शिंभू जोधपुर के राव मालदेव ने श्री जंभेश्वर महाराज से प्रसन्न किया कि आदि देव परमात्मा के कितने नाम हैं?वह किन-किन नामों से जाना जाता है? रावजी की जिज्ञासा जान गुरु महाराज ने यह शब्द कहा:- सहस्र नाम सांई भल सिंभु म्हे उपना आदि मुरारी हें जिज्ञासु! आदि देव परमात्मा के हजारों नाम है। वह सब का स्वामी है। उस मुरारी को किसी ने नहीं बनाया, वह स्वयं अपने आप उत्पन्न हुआ है। वही आदि…


शब्द नं 95
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 वाद विवाद फिटाकर प्राणी एक ज्योतिषी ने जोम्भोजी से प्रश्न किया कि ज्ञान तो वेद- शास्त्रों पर विचार मंथन करने से तथा शास्त्रार्थ करने से आता है और इस कार्य के लिए कोई जल्दी भी नहीं है। बहुत बड़ी उम्र पड़ी है।अब तो सांसारिक जीवन के सुख भोग का समय है। ज्योतिषी के उपर्युक्त विचार जान, जाम्भोजी ने उसके सम्मुख यह शब्द कहां:- वाद विवाद फिटाकर पिराणी छाड़ो मनहट मन को भाणों हे प्राणी!वाद-विवाद करना छोड। व्यर्थ का तर्क-वितर्क…




