FB IMG

शब्द नं 114

ऐप पर पढ़ें!

शब्दवाणी, भजन, आरती, जांभाणी कैलेंडर और बहुत सारे फ़ीचर सिर्फ ऐप्प पर ही उपलब्ध है जरूर इंस्टॉल करें

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
सुर नर तणौ संदेशों आयौ
एक समय समराथल धोरे पर श्री जंभेश्वर महाराज के पास सेखा जाट और उसके कई साथी आये। उन्होंने गुरु महाराज की वंदना करने के पश्चात कहा कि ये जंगल में रहने वाले भोले-भाले किसान है।धर्म, क्रिया कर्म आदि के बारे में कुछ नहीं जानते। गुरु महाराज ने कोई ऐसा उपदेश दे, ताकि इस जीवन में उनका कल्याण हो सके। जाटों की जिज्ञासा जान,गुरु महाराज ने उन्हें यह शब्द कहा:-
सुरनर तणो संनेसो आयो सांभलीयो रे जाटो

हे जाट- जमात के लोगों!हम यहाँ देवों के देव भगवान विष्णु का संदेश लेकर अवतरित हुए हैं। तुम हमारे इस संदेश को सुनो, समझो और अभी भी संभल जावो। सचेत हो जावो।

चानणै थकै अंधेरे क्यु चालो भूल गया गुरू वाटो

तुम अपने सतगुरु द्वारा बताये गये ज्ञान और मुक्ति के प्रकाशमान मार्ग को भूलकर इस अज्ञानता के अंधकार में क्यों भटक रहे हो? अभी समय है, तुम गुरु ज्ञान की रोशनी में मुक्ति की राह पर चलो।

नीर थकै घट थुल क्युं राखो सबल बिगोवो खाटो

जल के रहते हुए भी तुम अपने इस स्थूल शरीर को यों मैला-कुचेला क्यों रखते हो? नित्य स्नान द्वारा शरीर को शुद्ध बनाओ। शरीर के निर्मल होने से तुम्हारा मन और चित्त प्रसन्न एवं पवित्र बनेंगे। तुम इस प्रकार हर समय संसारिक माया-मोह के धंधों में उलझ कर अपना यह मानव जीवन व्यर्थ ही क्यों खो रहे हो?तुम जानते हो,जैसे छाछ को मथना व्यर्थ हैं,उसी प्रकार इन सांसारिक कार्यों में निरंतर लगे रहना भी व्यर्थ ही है।

मागर मंणिया क्यूं हाथ विसाहो कांय हीरा हाथ उसाटो

यह मानव जीवन, जो हीरों के समान मूल्यवान है, इस अति कीमती,जीवन रूपी हीरे को व्यर्थ के कार्यों में लगा कर तुम अपने हाथों से क्यों फेंक रहे हो?यह मनुष्य जीवन और आत्म ज्ञान प्राप्ति का मार्ग मूल्यवान हीरो के समान है, जिन्हें तुम अपने ही हाथों से फेंक रहे हो और यह धन संपत्ति, मोह माया, जो मुर्दा शंखियों के समान है, जिन्हें तुम अपने हाथों संभाल-संभाल कर रख रहे हो।

सुरनर तणों संनेसो आयो सांभालियो रे जाटो

अतः हे जाट जनो।अभी भी समय है।संभल जावो। शुभ कर्म करते हुए धर्म की राह पर चलते हुए इस मानव-जीवन रूपी हीरे से,आत्मज्ञान, स्वर्ग और मोक्ष की अमूल्य नीधियाँ प्राप्त कर लो। तुम्हारे लिए भगवान विष्णु के इसी संदेश को लेकर हम यहाँ अवतरित हुए हैं।

क्षमा सहित निवण प्रणाम
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
जाम्भाणी शब्दार्थ

ऐप पर पढ़ें!

शब्दवाणी, भजन, आरती, जांभाणी कैलेंडर और बहुत सारे फ़ीचर सिर्फ ऐप्प पर ही उपलब्ध है जरूर इंस्टॉल करें


Discover more from Bishnoi

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Sanjeev Moga
Sanjeev Moga
Articles: 660