सबद — 113

“दोहा” मुला सधारी यूं कहै, महंमद ही फुरमान। रोजे रखे निवाज पढ़े, बंदगी करै साहब तेहि मान सबद 112 को सुनकर मुल्ला कहने लगा — आप ऐसी बातें क्यों कहते हैं जिससे हमको दुःख होता हैं हम तो मुहम्मद साहब…

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शब्द नं 114

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 सुर नर तणौ संदेशों आयौ एक समय समराथल धोरे पर श्री जंभेश्वर महाराज के पास सेखा जाट और उसके कई साथी आये। उन्होंने गुरु महाराज की वंदना करने के पश्चात कहा कि ये जंगल में रहने वाले भोले-भाले किसान…

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शब्द नं 115

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 म्हे आप गरीबी तन गूदडियो एक समय एक नाथपंथी जोगी श्री जंभेश्वर महाराज के पास आया और उनके सीधे-सादे पहनावे और अति शांत स्वरूप को देखा तो,उसने हाथ जोड़कर कहा कि आप अवतारी पुरुष होकर भी इस प्रकार की…

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शब्द नं 116

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 आयसां मृगछाला पावोडी कायं फिरावो एक समय बहुत से नाथ योगी मृगीनाथ के नेतृत्व में गुरू जंभेश्वर महाराज के पास समराथल पर उनकी परीक्षा करने आये।मृगीनाथ ने अपने तंत्र- बल के आधार पर मृग छाला और पावोड़ी को ऊपर…

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शब्द नं 117

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 टुका पाया मगर मचाया कनफाडे़ नाथपंथी जोगियों की जमात को जब श्री जंभेश्वर महाराज ने योग सिद्धि के चमत्कार दिखाना, योग का उद्देश्य न बतलाकर पेट पालने का पाखंड और बाजीगरी बतलाया, तब मृगीनाथ ने पुनः कहाकि वे कोई…

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शब्द नं 118

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 सुरगां हूंता स्वयंभू आयौ पूर्व जन्म का एक तपस्वी कारणवश पुनः मनुष्य के रूप में उत्पन्न हुआ। उसे अपने पूर्व जन्म में घटित वह घटना याद रही, जिसके कारण उसे पुनः जन्म धारण करना पड़ा। अतः वह जन्म से…

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शब्द नं 119

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 विसन विसन तू भण रे प्राणी एक समय संत ऊदे, अतली ने गुरु महाराज से यह जिज्ञासा प्रकट की कि उनके अपने शरीर पर पूर्व जन्मों में किए हुए पापों का जो इतना अधिक भार है वह कैसे उतरेगा?…

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शब्द नं 120

विसन विसन तूं भण रे प्राणी इस जीवन के हावै रत्ना राहड नाम का व्यक्ति गाँव जाँगलू का रहने वाला था। उसने अपना जीवन अतिथियों एवं साधु संतों की सेवा में लगा रखा था। एक बार वह गुरु जंभेश्वर के…

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