
शब्द नं 119
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻 विसन विसन तू भण रे प्राणी एक समय संत ऊदे, अतली ने गुरु महाराज से यह जिज्ञासा प्रकट की कि उनके अपने शरीर पर पूर्व जन्मों में किए हुए पापों का जो इतना अधिक भार है वह कैसे उतरेगा? उनके पापों की संख्या इतनी है,जितनें शरीर पर बाल।उनके इतने सारे पाप कैसे दूर होंगे तथा उनकी मुक्ति कैसे होगी? अपने भक्त ऊदे और अतली की जिज्ञासा जान गुरु महाराज ने उने यह शब्द कहा:- विसन विसन तूं भण रे…

शब्द नं 120
विसन विसन तूं भण रे प्राणी इस जीवन के हावै रत्ना राहड नाम का व्यक्ति गाँव जाँगलू का रहने वाला था। उसने अपना जीवन अतिथियों एवं साधु संतों की सेवा में लगा रखा था। एक बार वह गुरु जंभेश्वर के सम्मुख उपस्थित हुआ। उसने यह जिज्ञासा प्रकट की कि वह ज्ञान,दान एवं भक्ति में किसका अधिकारी है ?उसे क्या करना चाहिए ताकि वह बैकुंठ धाम को पा सके।रत्ने की जिज्ञासा जान गुरु महाराज ने उसे यह शब्द कहा:- विसन विसन…



